Poetry 1 min read 790.5K reads

मुर्शीदा।


इतनी मिलती जुलती है हमारी ज़िंदगीहम कहते है इत्तेफ़ाक़ इसे।

पूछा जो मुर्शीदा से तो जवाब आया,"इश्क़ की किताब में एहतिकाफ़ इसे"।

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