इतनी मिलती जुलती है हमारी ज़िंदगी

हम कहते है इत्तेफ़ाक़ इसे।

पूछा जो मुर्शीदा से तो जवाब आया,

"इश्क़ की किताब में एहतिकाफ़ इसे"।