भागी हुई लड़कियां ले जाती है

बाप का मान

घर की शान

माँ की बिछुड़ी

बहन की टूटी हुई चूड़ियां

भाई की आज़ादियाँ

कह जाती है थी मेरी मज़बूरियां।