बादल बन रोए प्रेम को, नैनन को दरस की आस,उसे भोर भी लागे रैन सम, कह कौन भरेगा उजास?....© फ़क़त_फरीदा ✍
बादल बन रोए प्रेम को, नैनन को दरस की आस,उसे भोर भी लागे रैन सम, कह कौन भरेगा उजास?
....© फ़क़त_फरीदा ✍