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मयकशी


जो इन हकीमों की जी हुजूरी नहीं होतीसो इसलिए बात कोई पूरी नहीं होती

मयकदे तो बस सहारा है ग़म भुलाने केमयकशी से प्यास दिल की पूरी नहीं होती

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