क्या लिखूं तुम्हारे बारे में
मैं अपना यार लिखूं या तुम्हारा प्यार लिखूं
बताओ तो सही
एक कविता में तुम्हारे बारे में क्या लिखूं
माफ़ी! शायद मुमकिन नहीं
तुम्हारी आँखें लिखूं या तुम्हारी रूह लिखूं
जो जाने कितनी ही ज़ंजीरों से जकड़ी रहती है
मेरे दिल में तुम्हारी बिना चैहरे के जाने कितनी ही
तस्वीरें रहती हैं
बहुत मुश्किल है तुम्हें एक कविता में बयां करना
अब तुम ही बताओ कि तुम्हारे बारे में क्या लिखूं
तुम्हारा दिल बाहर से पत्थर और अंदर से गुलाब है
तुम्हारे इश्क़ में तुमसे जुड़ा हर एक इंसान है
मगर फिर भी बताओ तो सही एक कविता में
तुम्हारे बारे में क्या लिखूं
हाँ अगर होता मैं एक कहानीकार
तो लिख देता तुम जैसी शख्सियत पर एक कहानी
जिसमें कुछ हद तक बयां तो हो जाता तुम्हारे बारे में
मगर अफ़सोस मैं ठहरा एक कवि एक शायर
बहुत मुश्किल है एक कविता को तुमसे जोड़ना
'अबी' क्या कर सकता है इतने अल्फ़ाज़ों का
जो हैं तो सही मगर तुम्हें बयां नहीं कर सकते
अब तुम ही बताओ कि क्या लिखूं तुम्हारे बारे में
मैं अपना यार लिखूं या तुम्हारा प्यार लिखूं।