न दुख में

न सुख में

समत्व में जियो!

मध्य का बिंदु है समत्व

दुख सुख के बिल्कुल मध्य का!

जहां शून्यता है

जहां रिक्तता है,

जहां सब कुछ ठहरा हुआ है!

जिस मन ने भौतिकता में

इतना दौड़ लगाया हो,

विश्राम बिंदु है समत्व!

आज सुख है

कल दुख है,

किंतु समत्व हमेशा है

निष्कामता हमेशा है,

इस निष्काम भाव में

लाभ हानि से परे

अपने मन को

पूरे समर्पण से स्थापित कर दो,

समत्व में रहो!

समत्व ही अक्षुण्ण शांति है!

दुनियादारी की सफलता

दुनियादारी की हार,

इससे परे है समत्व,

समत्व में ही असली सुख है!

क्षण भंगुर दुनिया में

एक मजबूत नौका है जो!!