समत्व
संतुलन है,
अस्थिर दुनियादारी में
जहां क्षण क्षण हिचकोले हैं
समत्व आप का मजबूत आधार है,
विपरीत और अनुकूल परिस्थितियों में
एक ऐसा क्षेत्र जो परम शांत है!
मानव वृहद की योजना बनाता
नित नए समीकरण साधता,
जिससे द्वंद उत्पन्न होता है!
उपद्रव को जो न्योता देता है,
शरणागति न होने से
मैं का वहम हो जाता है,
ये वहम आंखो पे पर्दा डाल देता है,
समत्व को आत्मसात करके
मध्यम मार्ग पे चलके ही
परम शांति की स्थिति मिलती है!
योगस्थ होकर
समत्व में स्थिर होकर
बिना लाभ हानि के आकांक्षा के,
निरंतर निष्काम कर्मयोग करने से
परम शांति है
परम शांति है!!
