इन परिंदों के तजुर्बे  से जीना सीखो मेरे दोस्त, हमसे ज्यादा दुनिया तो इन्होंने देख रखीं हैं। हम तो समझते थे अल्हड़ फकीरा इनको, पर रास्तों की खोज तो हमसे पहले इन्होंने कर रखी है। क्या गुरुर करें हम अपने कद का अब, हमसे ज्यादा उंचाईया तो इन परिंदों ने छुई  हैं। है परिवार हमारे बड़े तो क्या, आंगन में चहल तो इन्होंने ने बना रखी है। हाथों में दौलत हमारे है  तो क्या, हमसे ज्यादा खुशियां तो इन परिंदों ने  खरीद रखीं हैं।