बंद हैं वो दरबाजे जो खुला रहता था मेरे लिए।
गुम हो गई फरियादे जो करता था हर जगह।।
उफ़ क्या समय था जब सुनते सुनाया करते थे।
अब तो बस याद ये दर्द चुभा करते है उनकी।।
जब हम करीब थे तो सारा जहाँ बयान होता था।
आज दूर क्या हुये सारा जहाँ से बुरा हो गए।।
आज भी मैं वही हूँ जो पहले हुआ करता था ।
बस पहले दिल से हंसा करता था।
अब फर्क है दिखावे के किये हंसा करता हूँ।।
क्यों बढ़ाई हाँथ छोड़ना था जो साथ मेरा।
आज हँसते है किस किस को गीला करूँ।।
तुम तो करीब थी मेरी समझ तो लेती एक बार।
क्या तोफा ही था तेरे मेरे बीच का दरार।।
जब भी आती हो याद बहुत रोता हूँ।
चाहकर भी बधाई न तुझे दे पाता हूँ।
तेरी हाथ की लकिरे मैं भी देख हैं।
उसकी हर पहलू बताया तुझे।।
तेरी हर बात जमाने छुपाया मैं ने।
काश तुम भी मेरी बात समझ लेती।
"राज" तुम कुछ जो छुपा लेती ।।
बदनाम हो गया आज महफ़िल में मैं।
इसी तरह चुकाते है अहसान अक्सर।।
तुम्हारी हर जुल्मो सितम काबुल मुझे।
प्यार था।प्यार हैं।प्यार रहेगा तुझसे।।
काश मेरी चाहत को समझ लेती।
यादों के महल को बदल देती।।