इश्क़ में कहाँ कभी आराम होता है;
मजदूर को तो हर वक़्त काम होता है।
इश्क़ में कोशिशें नाकाम नहीं जाती;
मंजिल न मिले फिर भी नाम होता है।
हर चाहने वाला बड़े सस्ते में बिका है;
कोई नहीं देता जो सही दाम होता है।
हाँथ यार का छुआ तो ऐसा लगा;
जैसे हाँथ में शराबी के जाम होता है।
मुहब्बत का मुक़द्दमा बड़ा अजीब है;
सजा वही दे जिसपे इल्जाम होता है।
इश्क़ हो तो दैरो-हरम एक से लगें;
महबूब खुदा महबूब ही राम होता है।