गणतंत्र
कल होगा एक उजला सवेरा,
जब हर दिल में देशभक्ति का जोश जागेगा
फिर चंद दिनों बाद ही,
मेरे देश का तिरंगा सड़कों पर अपना अस्तित्व झाँकेगा !
क्या फितरत है देश के इंसानो की,
शहादत पर हुँकार भरते हैं
जब भूखे पेट सोता है एक बच्चा तो,
देश की गरीबी का रोना रोते हैं !
कल सजा होगा हर एक हाथ में तिरंगा,
और देश की समृद्धि का गुणगान हर जगह होगा
और दिन ढलते ही वापिस,
हर एक शहादत का उनके हाथो फिर अपमान जरूर होगा !
मुझे देश से प्यार है अपने,
जो सिर्फ एक दिन का मोहताज़ नहीं
यारों ज़रा खुद में एक बार अपने झाँको,
क्या तुम्हे देश से प्यार नहीं !!


