गहरी शांति, बिल्कुल ही गहरी

एक असीम गहरी शांति

हमारे आसपास फैली ये शांति

क्या हमें हमारे उन पापों से 

मुक्त कर पायेगी

जिसे हमने तब 

एक ऊंचे शोर के आड़ में 

छुपकर किया था

वो समय जब हम 

शांति का गला घोंटकर

जीवन के आनंद ले रहे थे

जब हमें पता था कि

गुरूत्वाकर्षण का सिद्धांत

आज भी उतनी ही शिद्दत से

काम करता है

कि ऊपर फेंकी गयी हर वो चीज

वापस लौटकर नीचे जरूर आती है

तब हमें ये नहीं पता था कि

यही शांति एक दिन

हमें हमारी औकात दिखायेगी


आज हमने अपने पापों से

मुक्ति पाने के लिए

शांति का दामन थाम रखा है

लेकिन खुद को बचाने की

जद्दोजहद में

क्या ये हमारे चरित्र का

दोगलापन नहीं है

क्या सब कुछ ठीक होने के बाद

हम वापस अपने उसी

पुराने ढर्रे में

वापस नहीं आ जायेंगे

और तब हम अपनी जीत का

जश्न मनाते हुए

एक तमाशा कर‌ रहे होंगे

और शांति फिर से

अपने अस्तित्व को पाने की

खोज में

आस लगाये बैठी होगी