रातों की ख़ामोशी

अंधेरे में छुप जायेगी

धूप की किरणें 

फिर एक नया सवेरा लायेगी


मिट जायेंगे सारे गम

जिनकी वजह से हुयी थी

ये आँखे नम

न किसी से गिला होगा

और ना ही शिकवा

अब तो बस

खुशी की रोशनी होगी जो

चारों ओर फैल जायेगी


हवा के झोंकों संग 

वो खुशबू आयेगी

जिससे ज़िन्दगी की 

हर फिज़ा लहरायेगी


न उम्र का बंधन होगा

ना वक्त की पाबंदी होगी

बस विचारों का मेला होगा

और एक नयी जुगलबंदी होगी


अभी तक था जो रूका हुआ

अब चलने की बारी आयेगी

ख़ामोश थी जो ज़ुबां अब तक

उसके कुछ कहने की बारी आयेगी


रातों की ख़ामोशी

अंधेरे में छुप जायेगी

धूप की किरणें 

फिर एक नया सवेरा लायेगी