इन झिलमिलाती रोशनियों की
कौंध से दूर
एक अंधेरी सी जगह है
जहाँ पर मैं सर टिकाकर
सोता हूँ
पर मेरा यूं सोना
किसी काम का नहीं
कवितायें थकान माँगती हैं
और मैं लोगों की भीड़ से बचकर
कहीं दूर
किसी खाली अंधेरी जगह पर
छिपा हुआ हूँ
मन में सिर्फ
कविताओं का भाव है
पर जब इन्हें शब्दों में
ढालने की कोशिश करो
तो सबकुछ फिसल सा जाता है
कागज़ की खाली जगह
मुझे देर तक चिढ़ाती है
अंधेरी जगहों पर
सर छुपाना आसान है
और रोशनियों के बीच
भटकते रहना, कठिन
आँखें बंद कर लेट जाना
आसान है
और कागज को देर तक
निहारते रहना कठिन


