क़भी वो मिली थी मुझे राहों में ,

आज थी किसी ग़ैर के बाहों में

अगर वो लौट के भी आ जायें ,किसी ख़त के तरह

तुम भूल जाना किसी मौत के तरह


-अभिषेक पाण्डेय