इतवार अपने आप में एक संज्ञा पुल्लिंग शब्द है, हम बचपन से स्कूलों में अपने घर पर माँ से संडे यानी रविवार के राटा लगाये है, और अब आलाप लगाते है कि अब वो बचपन वाला रविवार नहीं आता, जहाँ बड़ी उत्साह से गली-गली चक्कर लगाते थे,पढ़ाई के बारे में पूछने वालो को करारा जवाब देते थे की आज संडे है, लेक़िन हमने कभी ध्यान नहीं दिया कि माँ के लिए रविवार सिर्फ बच्चो के सिखाने तक सीमित रह गया। माँ के हिस्से में कभी रविवार नहीं आया, ये इतवार शब्द कभी स्त्रीलिंग के हिस्से में नहीं आया जैसे कोई अछूत हो।


-अभिषेक पाण्डेय