हमने तो किया था प्यार मगर,

तुमने इश्क़-ए-तिज़ारत की है।

तुम भूले मुझे, तुम्हारी फ़ितरत,

हमने तो टूट कर मुहब्बत की है।

बहुत रोये, उल्फ़त में पशेमान हुए,

इस कदर तुमने हम पे इनायत की है,

गैरों के शानों का सहारा ले कर,

क्या ख़ूब तुमने हमसे शरारत की है।


- मिराज़ 'अभि'