तस्वीर संजोये तेरी दिल में,

बैठे हैं मनभावन,

यादों को सीने से लगाये,

फ़िरते हैं हम वन वन,

फुआर जो बरसे प्रेम में तेरे,

भींगे प्यासे तन मन,

बैरी बदरिया अब तो पिघल जा,

सूखा जाये दामन,

बेरंग हैं दिल की दीवारें,

सूना है चित का आँगन,

बंजर मन की धरती पे,

जाने कब बरसेगा सावन।


-मिराज़ 'अभि'