आज भी अक्सर चाय की उस दूकान पे कदम ठहर जाते है,

जहाँ कभी तुम्हारे इन्तजार में कई घंटे बिता दिया करता था,

यूँ तो आज भी पहचान जाता है वो चायवाला और, 

आँखों ही आँखों में पूछ भी लेता है, 

बड़े दिनों बाद आज अकेले दिखाई दिए हो,और मेरे पास इस बात का कोई उत्तर नहीं होता, और

हर बार की तरह फिर चुपचाप चला आता हूँ,

पीछे छोड़ के चाय के गर्म प्याले को जिसे कभी हम दोनों साथ में बाँट लिया करते थे