यूँ तो आज भी नीम के पेड़ के नीचे चबूतरा बना है,

मगर अब दुपहरी में वहां कोई हुजूम नहीं जुड़ता,

यूँ तो डाली अभी भी बहुत मजबूत हैं उसकी,

मगर उन पर अब कोई झूला नहीं पड़ता,

यूँ तो आज भी बहुत ठंडी छाया देता है वो,

मगर कूलर एसी के आगे वो अच्छा नहीं लगता,

इसीलिए मेरा गांव अब गांव नहीं लगता...