प्रेम में प्रतीक्षा का अपना अलग ही सुख है। यहां आप आने वाले नए पलों के साथ नहीं अपितु बीते हुए पलों को फिर से जी लेते हैं, और इसमें प्राप्त सुख को कोई वयां नहीं कर सकता।

क्योंकि एकबार किया गया कर्म बिना अपना फल दिए नष्ट नहीं होता।