
एक हृदयविदारक घटना से आज मन बहुत दुखी हुआ। इतना सब हो जाने के बाद मानव प्रकृति से छेडछाड़ बंद नहीं कर रहा है।
कहीं पढ़ा था की मानव इस प्रकृति की सबसे उत्कृष्ट रचना है परन्तु आज उसी कृति का हिस्सा होकर स्वयं को लज्जित महसूस कर रहा हूँ।
अभी तक मैं प्रकृति की प्रलय से सिर्फ आशंकित था परन्तु अब मैं निश्चिन्त हूँ कि मानव ने विनाश के इस युद्ध को अब अंतिम मोड़ पर ला दिया है, जिसमे उसका विनाश निश्चित है।
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