वो न एकदम बेबाक और पागल लड़की है,उसके लड़कियों से ज्यादा लड़के दोस्त है.
मुझसे अक्सर कहा करती थी ये बॉयफ्रेंड मेरी समझ में नहीं आते, मुझे ना तेरे साथ रहना बहुत पसंद है, तेरे से बात करके ऐसा लगता है जैसे बहुत दिनों बाद किसी अपने से बात कर रही हूँ...
लगता ही नहीं है की तू मुझसे कुछ दिन पहले ही मिला है, ऐसा लगता है जैसे मैं तुझे बचपन से जानती हूँ, और शायद इसीलिए वो मुझसे अपने दिल की हर खट्टी मीठी बाते कर लेती थी... उस से मिलके शायद मुझे भी यही मह्सूस हुआ था, और शायद इसीलिए हमारे बीच बातों का सिलसिला चलता रहा.
वो जब बोलती थी न तो ऐसा लगता है जैसे उसे किसी और की कोई जरुरत है ही नहीं
उसका मासूम सा चेहरा एकदम नन्हे बच्चे जैसा होता और मैं बस चुपचाप उसे सुनता रहता था जैसे उसे महसूस कर रहा हूँ...
मुझे लगता है उसकी बेख़ौफ़ और बेबाकी के चलते उस से कई लड़के प्यार करने लग गए होंगे मगर उसे खो देने के डर से कोई कुछ कह ही नहीं पाये होंगे.
वैसे उसे झेलना कोई आसान बात नहीं थी,जब वो गुस्सा हो जाती थी तो दुर्गा बन जाती थी औरबस मेरी जान कैसे भी करके बच ही जाती थी.
वैसे तो उसे चाय कोई खास पसंद नहीं थी मगर हम ठहरे चाय के दीवाने तो उसे कैसे इसके मोह से दूर रहने देते तो बस लग गए काम पे...
और आखिर में उसे चाय की तालाब लग ही गई....
तो ये थी हमारी चाय और एक अजीज दोस्त से अजीज मुलाक़ात, कहने को तो अब बातें पहले से काम ही होती है मगर जितनी भी होती है दिल से होती है, उसी बेबाकी और अल्हड़पन के साथ चाय की कुछ चुस्कियों के साथ...