मैं एक गुलाब हूं पत्तियों के मुरझाने पर सवाल नहीं करता।
घिस दो पीस दो या मुझे मशल दो मैं अपनी खुशबू नहीं बदलता ।
रंग पड़ जाए फ़ीका मेरा पर मैं रंग नहीं बदलता।
तोड़ दो तुम मेरी हर नज़्म को पर मैं अपने टूट जाने की सिकायत नहीं करता।
अभिषेक भदौरिया ✍️


मैं एक गुलाब हूं पत्तियों के मुरझाने पर सवाल नहीं करता।
घिस दो पीस दो या मुझे मशल दो मैं अपनी खुशबू नहीं बदलता ।
रंग पड़ जाए फ़ीका मेरा पर मैं रंग नहीं बदलता।
तोड़ दो तुम मेरी हर नज़्म को पर मैं अपने टूट जाने की सिकायत नहीं करता।
अभिषेक भदौरिया ✍️