मेरी गंगा और तेरा आब-ए-जमजम,
अगर मिल जाऐं तो अमृत निकले,
जिसे पीकर इस कौम-ए-नफरत की ,
हर दीवार का बस दम निकले ।
लगे जो आग तो हम आब बन जायें
मेरा नमस्ते तेरा आदाब बन जाए,
तू बन जाए मेरा बिस्मिल ,
और हम तेरा अशफ़ाक़ बन जाएं ।
न बांटे से बंटा है चाँद जो अब तक,
है जो भगवान मेरा हुआ तेरा वही रब,
जो हमको है बताती करवाचौथ,
बताती है तुम्हे कि ईद है कब ।


