इस चकाचौंध सी रोशनी को न देख ,

हर जगह पे दिखावे के पहरे हैं ,

उनके मुह पे बिखरी खुशी को न देख

जाने हर चेहरे पे कितने चेहरे हैं ।

भीड़ तो है बस अकेलो का जत्था जैसा,

अकेलो की सुन उस शोर भरी महफ़िल में,

बन्द होगी किवाड़ तू ढूंढ इक झरोखा,

गर मौका मिले तो झाँक उनके दिल मे ।

मिलेगा इक इंसान तुझे तेरे ही जैसा,

जिसके ग़म और हँसी तेरे जैसी ही होगी,

खोल पाए अगर तू उसकी बन्द किवाड़े,

तो शायद फिर कोई मौत ऐसी न होगी ।