पहले तोड़ी गर्दन, फिर काटी जुबान,

कितना बदल गया है इंसान।

मानवता को शर्मशार कर,

दरिंदगी का दामन थाम कर,

बन बैठा है शैतान,

कितना बदल गया है इंसान।।


क्या ऐसा होगा तुम्हारा रामराज्य,

जहाँ पनपेगा दरिंदो का साम्राज्य।

माँ की आँसुओ पर कुछ तो तरस दिखाते,

बेटी के पार्थिव को यूँ रातो रात न जलाते।

जिंदा नही तो मरने पर ही दे देते यथोचित सम्मान,

बहुत हुआ, लौटा दो हमे हमारा देश महान।

कितना बदल गया है इंसान,

कितना बदल गया है इंसान।।


क्यूँ बनाया तूने ऐसा जहान,

जहाँ महफूज़ नही तेरी ही संतान,

कभी पीड़ित हुई द्रौपदी तो कभी सीता महान,

तेरे भरोसे ही हैं ये बेटियाँ तमाम,

दिखा कुछ करतब अब हे भगवान।

कितना बदल गया है इंसान,

कितना बदल गया है इंसान।।

                  -- अभिनव श्रीवास्तव