एक ओर है बाढ़ तो है दूसरी ओर कोरोना,
हे राम! अब तुम्ही बताओ जाए हम कौन कोना।।
सरकार है मशगुल 'घोड़ो' की खरीदारी में,
छोड़ त्रस्त जनता को इस भयंकर माहमारी में।
भेजो, फिर बजरंग को लाखों सौमित्र बचाने हैं,
बन किसी को फिर से केवट वैतरणी पार कराने हैं।
चल रही कहीं लाठियाँ महरुम किसानों पे
तो पलट रही कहीं 'गाड़ियाँ' जनता के अरमानों पे।
वर्षों में बना पूल दिन 29 में बह जाता है,
ऐसा काम जाने किस सुशासन की शोभा बढ़ता है।।
अब तुम्हे भी 'ओली' है लगा बताने नेपाली
ऐसा करा कर ड्रैगन खुशी से बजा रहा है ताली।
लेकिन है यकीन तुम तो हमारे अवधपति हो ना,
हे राम! अब तुम्ही बताओ जाए हम कौन कोना।।
लगता है मंदिर तुम्हारा अबकी बन ही जाएगा,
पर है इंतज़ार उस दिन का जब रामराज्य सच मे आएगा।
जीवन मूल्यों को है हमें मजबूत धागे में पिरोना,
घनघोर अंधियारे में भी इंसानियत नही खोना।।
एक ओर है बाढ़ तो है दूसरी ओर कोरोना,
हे राम! अब तुम्ही बताओ जाए हम कौन कोना।।


