हमी से उम्मीदे तुमको हमी पे बंदिशे सारी हमी से इश्क़ भी तुमको हमी से रंजिशें सारी रात भर मेरे ख़ाब से उलझन में रही हो तुम गवाह से तुम्हारे चादर की सिलवटे सारी तुम कही आस-पास हो तो आहट आ जाती है मुझको बता देती है बढ़ती धड़कने सारी