हालात कुछ ठीक नही शहर के |

तुम भी घर में रहा करो |

वजह बहुत बड़ी है अपनी और अपने परिवार की |

जरा फिकर करा करो |

मंजर बहुत खतरनाक है लाशों की बारात है |

मत जाओ घर से बाहर कुछ सांसों की ही तो बात हैं |

वेवजह क्यों कर रहे हो अपनी जान का सौदा जो दिखता नही उससे क्या लड़ना |

घर में बैठो अगर कुछ अच्छा चाहते हो |

मत करो जंग अपनी जान से |

रास्ता कोई नही बस कुछ दिन की ही तो बात है |

लगाओ मास्क जरा सा दूर हट कर खेड़े हो |

धो हाथ सायद तुम घर के बड़े हो |

इस कविता के माध्यम से मै अपनी बात कहे रहा हूं |

मेरा भी तो परिवार है मैं भी अपने हालातो से लड़ रहा हूं |

तुम भी थोड़ा ध्यान दो और सरकार के नियमो का साथ दो |कृपया मेरी बातो पर ध्यान दो ।

हालात कुछ ठीक नही शहर के |

तुम भी घर में रहा करो |