दूर किनारे पेड़ों की छावपर्वत पर बैठे सोच लियाये झील सा पानी और शांत आकाशस्वर्ग और कहां होगा पूर्ण है विश्वास
दूर किनारे पेड़ों की छावपर्वत पर बैठे सोच लिया
ये झील सा पानी और शांत आकाशस्वर्ग और कहां होगा पूर्ण है विश्वास