एक साल ऐसा भी


ना अचारों की खुशबू,


ना बर्फ की चुस्की,


ना गन्ने का रस,


ना मटके की कुल्फी ॥




एक साल ऐसा भी..


ना शादियों के कार्ड,


ना लिफाफों पर नाम,


ना तीये का उठावना,


ना दसवें की बैठक ॥




एक साल ऐसा भी..


ना साड़ी की खरीदारी,


ना मेकअप का सामान,


ना जूतों की फरमाइश,


ना गहनों की लिस्ट ॥




एक साल ऐसा भी..


ना ट्रेन की टिकट,


ना बस का किराया,


ना फ्लाइट की बुकिंग,


ना टैक्सी का भाड़ा ॥




एक साल ऐसा भी..


ना नानी का घर,


ना मामा की मस्ती,


ना मामी का प्यार,


ना नाना का दुलार ॥




एक साल ऐसा भी..


ना पिता का आंगन,


ना माँ का स्वाद,


ना भाभी की मनुहार,


ना भाई का उल्लास ॥




एक साल ऐसा भी..


ना मंदिर की घंटी,


ना पूजा की थाली,


ना भक्तों की कतार,


ना भगवान का प्रसाद ॥




एक साल ऐसा भी..


सदा रहेगा


इस साल का मलाल,‍‍‍


जीवन में फिर


कभी न आये ऐसा साल ॥