आईना मुझे पहचानती है
मेरी कमियों को जानती है
कोशिशें ज़िंदा हैं
उम्मीदें कायम हैं
और मुन्तज़िर हैं हम
ये कब मुकम्मल मानती है
~ अभिनव


आईना मुझे पहचानती है
मेरी कमियों को जानती है
कोशिशें ज़िंदा हैं
उम्मीदें कायम हैं
और मुन्तज़िर हैं हम
ये कब मुकम्मल मानती है
~ अभिनव