कोशिश थी
कि दो वक्त की दो रोटी मिल जाये
पतली और मुलायम ना सही
पर मोटी ही मिल जाये
भूख के एहसास में
मेरे बच्चे ने ज़िंदगी की हार बयां कर दी
और रोक न सके उस मासूम को जानें से
वो आवाज यादों के पिंजरे में खोती गयी
जाते-जाते ज़िंदगी की आहट धीमी होती गयी
~
अभिनव

