अंधेरों के करीब रह के एक तस्दीक की है

उस जहां में एक जुगनू की अहमियत काफी है 


वो सोंचते हैं कि ये मल्हार कैसे गा सकतें हैं

उनकी चिंता पे गूंगो का इंकलाब भारी है ।


हो कितना कठिन दौर , पैर बस जमाये रहिये ,

तूफ़ां बस चंद लम्हों का है फिर आपकी बारी है ।


बयाबान में एक दरख़्त की ही बड़ी अहमियत है

तूफ़ां की मशक्कत में चिराग का जलना जारी है


सोंचतें होंगे वे कैसे रोंके इनके विजय रथ को ,

उनके माओ लेनिन पे जय श्री राम भारी हैं ।