
सर्दियां जब थोड़ी
और कड़वी हो जायेगीं,
चिनार के हरे पत्ते,
जब सफ़ेद बर्फीले
लिहाफ़ में कहीं खो जायेंगे,
तब मैं,
एक ग़ज़ल लिखूंगा तुमपर.
तमाम मुन्तशिर जज़्बातों को,
समेटूंगा और,
उन्हें छोटे महीन
पानी की बूंदों सा बनाकर,
रख दूंगा किसी शफ़ाफ़ अब्र में,
और शायरी कह दूंगा उसको.
तुम्हारी हलकी पिली,
मुस्कुराहटों की शायरी.
हमारे मिलने और बिछड़ने
वाली रातों की शायर
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