मैं, ही मेरा हौसला,
मैं, ही मेरी हिम्मत हूं,
मेरे हार जाने की सोच में भी,
मैं ही अभी जिंदा हूं।।

मेरा इतना "मैं" कहने में,
अहंकार,शायद कुछ नजर आए।
पर सच में,ये मेरा अडिग विश्वास है
जो कुछ कर गुजर जाए।।

हार की परिस्थिति में,
असंख्य विचारो का दलदल मुझमें।
पर जीत की चाह भी कुछ ऐसी
निकल जाने की शक्ति भी मुझमें।।

समझना मुझे बस अब
इस मेल को ही है,
मेरा ही मुझसे हार जाने से
जीत जाने के खेल को ही है।।
अभिमन्यु सिंह