करूँ तेरा ज़िक्र या
अहसासों में रहने दूँ।
करूँ तुझे महसूस या
धड़कन में बहने दूँ।
तू है मेरे हर अँधेरे और उजाले में शामिल,
तुझे लफ्जों में करूँ बयां या "इबारत" में रहने दूँ।
ऐ रूह-ए-ज़िन्दगी...
ऐ सुकूँ-ए-ज़िन्दगी...
मेरी ऐ राहत-ए-जिंदगी..
तुझे मैं क्या नाम दूँ।