वो छरहरी धूप , वो डलती शामें वो रानीपुर की सड़के ओर संग तुम्हारी यादें वो स्कुटी के पहियो से, तेज भागती जिन्दगी ओर गमगीन रातें.. वो भीगे से रास्ते , थमती हुई साँसें , ज्वालापुर की गलियाँ और एक प्लेट में रखी दो मठ्ठियाँ , वो बसों के इन्तज़ार सी टहरी यादें घड़ी के काँटें सी , पल पल भागती जिन्दगी और मुझे रोकती ये बातें.. - अभिलाषा रासौ 'राशी' ( @Rasho_Abhi )