वो थोड़ी गुदगुदाई सी हैं थोड़ी मुस्कुराई सी हैं आँखों को मीचें , पलको के नीचे , ख्वाबों में डूबी सी हैं.. होंठों की लाली में , कानों की बाली में , धड़कनें छुपाई सी हैं... मुठ्ठी लिए यादें सुहानी , यूँ हुए जा रही मस्तानी , जाने क्यूँ ये झल्ली आज पगलाई सी हैं... - अभिलाषा रासौ 'राशी' ( @Rasho_Abhi )