बूँदें बन बारिश की बिखर जाऊँ तुझ में , यूँ ही सिमट जाऊँ तुझ में चन्दन को सर्प सी , यूँ ही लिपट जाऊँ तुझ से , कभी हँसी ,तो कभी आँसू बन के , मैं रही कहीं ना कहीं तुझ मे मिलन का झुठा ख्वाब देखने दो इक बार यूँ ही फिर से ... - अभिलाषा रासौ 'राशी' ( @Rasho_Abhi )