शहर का ये आखिरी कोना, स्याह रात में चन्द जुगुनुओं का टिमटिमाना, भीगी अधजली चैले से धुंए का उठना, मसान में अनगिनत लाशों का जलना, चन्द सांसों को जन्मे इन कीट पतंगों का अफसाना, राख़ हो चुकी देहों की अजीब सी गंध अपने वजूद को ढूंढता ठूंठा पेड़, सभी तो अंत की ओर अग्रसर है, तो बताओ भला...... क्या मौत को भी मौत से डर लगता होगा?