यूँ तो जरूरी नहीं था लिखना इतने सालों बाद तुम्हें कुछ भी पर जब वक्त होता है कम गैर जरूरी लगने वाली बातें हो जाती हैं जरूरी याद आ जाता है बहुत कुछ जिनको लिखना होता है उतना ही मुश्किल जितना मुश्किल होता है उन्हें भूलना । शायद खतों का ईजाद किया गया हो इसी खातिर ताकि जब यादों पर जमने लगे धूल कोई तस्वीर होने लगे धुंधली तब बैरन हवा से फड़फड़ाये वो पन्ना जिसमें लिखा हो वो सब जिसे पढ़े बिना ही नम हो जाये आँखे समझ जाये दुनिया पीला पड़ चुका ये कागज का टुकड़ा सिर्फ कागज नहीं, है बहुत कुछ शायद एक जिंदगी । बस वही जिंदगी भेज रहा हूँ लिख कर जिये थे जिसके कुछ पल हमने एक साथ जिंदा रहें जो मेरे बाद भी मेरे इस आखरी ख़त में !