
किसी भूखे की भुख को मिटाने के लिए ।
अपने खाने की एक रोटी त्याग देते है ।
लड़े थे जो शरहद पर जान हमारी बचाने के लिए ।
चलो फिर नमन उनको हजार कर लेते है ।
और सरहदों पे जवानों को आंख दिखाते है जो ।
उनके ही घर मे घुसके उनको उखाड़ देते है ।
बादलो के बीच जो शहर खो जाते है ।
हम अपनी नजर से वो शहर दूंढ ले
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