किसी भूखे की भुख को मिटाने के लिए । अपने खाने की एक रोटी त्याग देते है । लड़े थे जो शरहद पर जान हमारी बचाने के लिए । चलो फिर नमन उनको हजार कर लेते है । और सरहदों पे जवानों को आंख दिखाते है जो । उनके ही घर मे घुसके उनको उखाड़ देते है । बादलो के बीच जो शहर खो जाते है । हम अपनी नजर से वो शहर दूंढ लेते है। सुन लेते हो जो तुम देश के खिलाफ कड़वे वचन । ऐसे में तुम सब क्यों नही अपनी जवानी त्याग देते है ।। आये जो दानव दिखाने आंख कान्ह को । माँ यशोदा कान्हा की बलाए उतार लेती है दिखाए जो आंख दानव माँ और बेटियों को । बन चंडी काली वो दुराचारियो का शीश धड़ से उतार देती है @kaviabhigupta Abhishek Gupta