जब पेड की शाखा ही शाखा को चुभने लगती है
औरे कही जब जीवन देने वाला ही जीवन को हरने लगता है
औरे कही जब योगी ही भोगी बन जाते है
तब इस धरती पर पूत कपूत बन जाता है
फसले बोने वाले ही जब हथियारों की खेती करने लगते है
उजियारा देने वाला जब अन्धकार कर देते है
देश की रक्षा करने वाले जब देश का सौदा कर डाले
तब समझो उस देश की उन्नति हि रुक जाया करती है
सफेद कपडे पहने जब नेता ही हत्यारे लगने लगते है
क्रान्तिकारी भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बिस्मिल,
आजाद जब नेता को आतंकी लगने लगते है
चुहे जब बिल्ली का खाना छीन के खाने लग जाए
तब समझो उस देश का गौरव ही खतरे में पड जाया करता है