हमारी सोच जब हमारा हथियार बने । देश के रक्षक ही जब देश के गद्दार बने ।। और देश के नेता संसद में बैठ देश का ही अपमान करे । और नेता का बेटा ही जब हमारी बेटियों का अपमान करे ।। और एक माँ जब बैठ अकेले कमरे में रातो को बेटे को याद करे । बेटे की यादों में जब माँ का धरा कंकाल बने ।। और दोस्त ही यंहा जब दोस्त का गुनहगार बने । और दुश्मन ही जब यँहा सच्चा यार बने ।। खुद की सोच जब ख़ंजर सा हथियार बने । और वो ख़ंजर जब हवस से भी खतरनाक बने ।। जब माँ बहनों की अस्मत लूट जाती हो धरती पर । तब इस धरती का इंसान जानवर से भी ज्यादा खुंखार लगे ।।