घर का आँगन जो कोहरे से धुमल हुआ…! आप ही आके कोहरा हटा दीजिए….!! मेरा जीवन युँ कुछ डगमगाने लगा- डगमगाने लगा ….! आप आके यहँ इक रात बिता लीजिए….!! चाहे दिन रात छुपके तुम मुझसे बैठी रहो …..! फिर भी तुमसे मुलाकात हो जाएगी …..!! जब भी चेहरा तेरा देखने मै लगा….! तो कहोगी की तुम सोचने मै लगा….!! पर ना कुछ तुमने मुझसे कहा…..!!! बारिसो की भांति आँसू गिरे …..!! लफ्ज सुनने को मैं तरसता रहा । प्यासा प्यासा सा हर बार मै रहे गया ……! प्यास मेरी कुछ तो भुझा दीजिए…….!!! काई जन्मो से तुमना इधर आई हो…! दुरियो की घटाएँ धटा दीजिए…..!! सूना सूना ये जीवन मुझको लगे…..! सूने पन को यू आके मिटा दीजिए…..!! घर का आँगन जो कोहरे से धुमल हुआ…..! आप ही आके कोहरा हटा दीजिए ……!!