देश विरोधी बाते भी जब तुमको अच्छी लगने लगती है ।
देश की मिट्टी भी जब तुमको अपने सीने पे चुभने लगती है ।
देश गीत गाना भी जब तुमको अपना अपमान लगे ।
कोई आतंकी जब तुमको अपना लगने लगता है ।
आतंकी का मर जाना जब तुमको दुख देने लगता है ।
शहीदों का बलिदान जब तुमको झूठा लगने लगता है ।
और तिरंगे को लहराना जब तुमको अपना अपमान लगे ।
और हमारा चुप रहना ही जब हमको ठगने लगता है ।
लगता है क्या तुम उस गुलामी को भूल गए ।
अंग्रेजो का शाषन भी तुम भूल गए ।
जन्हा लुट जाती हो माँ बहनो की अस्मत ।
लगता है क्या तुम अब वो पाकिस्तानी भूल गए ।
और ओवैसी के नारे जब तुमको गीता से भी अच्छे लगते है ।
वन्देमातरम गाना जब ओंठो को पीड़ा देने लगते है ।
अंसारी राष्ट्रपती को जब देश मे डर लगने लगता हो ।
तब भेड़िये अपने को शेर समझने लगते है ।
जब सरकारे भी जनता को ठगने लगती है ।
जब अस्पताल में लापरवाही से बच्चे भी मरने लगते है ।
और अस्पताल में भी साजिस होने लगती हो ।
तब छप्पन इंची सीना भी हत्यारा लगने लगता है ।
@AbhiAnjaan@