चली आओ न
मैं बुलाता हूं एक बार चली आओ न,
जमाने कि हवाओं के रूख मोड़ चली आओ न।
इससे पहले कि मै ही चला जांऊ कहीं,
सारे रिवाजों की बेड़ियाँ तोड़ चली आओ न।
मैं बुलाता हूं एक बार चली आओ न
कितना किया है इंतजार एक सिर्फ तुम्हारा,
अब और होता नहीं इंतजार चली आओ न।
दिल है बड़ा बेकरार एक तेरे लिए,
अब और न तड़पाओ चली आओ न।
मै बुलाता हूं एक बार चली आओ न
बेशक होती नहीं तुझसे गुफ्तगू आज तो,
मगर भूला नहीं आज भी तेरी बातों को
वो बातें पुरानी करनी हैं तुमसे चली आओ न ।
मैं बुलाता हूँ एक बार चली आओ न
तेरी आरजू में जिये जा रहे हैं,खुद को तुझसा किये जा रहे हैं
इससे पहले हम खुद तुझसा हो जांये चली आओ न।
मै बुलाता हूँ एक बार चली आओ न।


