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तुम्हारी सारी यादें छंद सी हो गई

Abhay DixitAbhay Dixit January 18, 2022
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सोचना जब भी कुछ चाहा,
पहले तस्वीर तुम्हारी नज़र आती,
ख्वाबों को कितना भी बांध लूँ में
पर ख्वाबों में आज भी तुम ही नज़र आती।।

न कोशिश तुम्हें पाने की है,
न ही मन मष्तिक तुम्हें भूलना चाहते,
अब एक लालसा है जीवन की,
जब भी विदा ले यहाँ से बस तुम्हें देखना चाहते।।

जब तक तुम्हारे साथ

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